पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा के नाम पर। आमीन। प्रभु की शांति और प्रेम आप सभी के साथ हो।
हे प्रभु, हम पर दया कर। हे मसीह, हम पर दया कर। हे प्रभु, हम पर दया कर।
हम अक्सर जीवन को एक ऐसी पहेली मानते हैं जिसे हल करना ही हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि है। हम इसे गणित के उन सूत्रों की तरह देखते हैं जिन्हें बेंजामिन वो (Benjamin Vo) इतनी सहजता से सुलझा लेते थे। बेन, वह पंद्रह साल का बालक जिसकी मेधावी बुद्धि क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर के जटिल कोड को ऐसे समझ लेती थी जैसे कोई अपनी मातृभाषा बोल रहा हो। लेकिन आज, जब हम उस पहेली के सामने खड़े हैं जो मृत्यु का सन्नाटा हमारे सामने रखती है, तो हमारे गणित के सब सूत्र फेल हो जाते हैं। हम उस खाली कुर्सी को देखते हैं, हम उस घर के सन्नाटे को महसूस करते हैं, और हम पूछते हैं—इसका उत्तर क्या है?
आज के सुसमाचार में, हम एक ऐसी स्त्री को देखते हैं जो यीशु के चरणों में बैठकर अपने आंसुओं से उनके पैर धो रही है। वह एक पापी स्त्री है, दुनिया की नजरों में जिसका कोई स्थान नहीं है। लेकिन यीशु की नजरों में, वह प्रेम का एक जीता-जागता प्रमाण है। यीशु सिमोन से कहते हैं, 'उसने बहुत प्रेम किया है, इसलिए उसके बहुत से पाप क्षमा कर दिए गए हैं।' देखिए, यीशु यहाँ पाप और पुण्य का हिसाब नहीं कर रहे हैं, वे हृदय की गहराई को माप रहे हैं।
एलन, थाओ, और रयान, मैं जानता हूँ कि तीन महीने पहले, 13 जून को, जब बेन ने इस संसार से विदा ली, तो आपके हृदय का गणित पूरी तरह बदल गया। कभी-कभी, जब आप बेन की उन तस्वीरों को देखते हैं—शायद वह तस्वीर जहाँ वह रयान के साथ एक छोटी सी नाव में बैठकर मुस्कुरा रहा है, या वह पल जब वह हवाई अड्डे पर विमानों को निहारते हुए अपनी मासूमियत बिखेर रहा था—तो आपको लगता होगा कि क्या यह सब केवल एक सपना था? उस मुस्कान में जो खुशी थी, क्या वह अब केवल यादों के पन्नों में कैद है? नहीं। वह प्रेम जो बेन ने आपसे साझा किया, वह कभी समाप्त नहीं हो सकता।
मैं आज आपसे उस भारी पत्थर के बारे में बात करना चाहता हूँ जो अक्सर माता-पिता के हृदय पर बैठ जाता है। वह है 'आत्म-दोष' का पत्थर। आप में से कई लोग, जो इस भारी दुख से गुजर रहे हैं, शायद रात के अंधेरे में खुद से पूछते हैं: 'क्या मैंने कुछ छोड़ दिया? क्या मैं कुछ और कर सकता था? क्या यह मेरी कोई कमी थी?' मैं आज आपसे यीशु के नाम पर कहना चाहता हूँ: उस बोझ को वहीं क्रूस के चरणों में रख दीजिए। बेन की बीमारी, उसका जाना—यह किसी की गलती नहीं थी। यह न तो कोई सजा थी, न ही किसी की लापरवाही का नतीजा। ईश्वर ने बेन को आपको सौंपा, और आपने उसे वह प्रेम दिया जो किसी भी महल की नींव से अधिक गहरा था। आप पूरी तरह निर्दोष हैं। ईश्वर आपसे नाराज़ नहीं हैं; वे आपके आंसुओं को अपनी हथेलियों में समेट रहे हैं। वह बीमारी, वह दुख, मानवीय नियंत्रण से परे था। ईश्वर ने उसे नहीं भेजा, और आप उसे रोक नहीं सकते थे। कृपया, खुद को माफ कीजिए। बेन नहीं चाहता कि उसके माता-पिता और उसका भाई खुद को दोषी मानें।
संत पौलुस आज के पहले पाठ में कहते हैं, 'ईसा मसीह हमारे पापों के लिए मरे, उन्हें दफनाया गया और वे तीसरे दिन जी उठे।' यह केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं है, यह हमारा जीवन-आधार है। बेन का जीवन इसी अनुग्रह का एक प्रतिबिंब था। याद कीजिए, वह बालक जो अपने चाचा विलियम की बीमारी के समय अपनी पूरी गुल्लक देने की पेशकश कर रहा था। उसने उसे तोड़ा नहीं, न ही उसने उसे खाली किया, क्योंकि उसकी आवश्यकता नहीं पड़ी, लेकिन वह 'प्रस्ताव' ही उसके हृदय का सबसे बड़ा सच था। वह अपने पास जो कुछ भी था, उसे न्योछावर करने को तैयार था। क्या आपको लगता है कि ऐसा हृदय कभी मर सकता है? नहीं। वह प्रेम अब भी जीवित है। आज वह प्रेम वियतनाम के का माऊ में उस कुएं (Giếng Gioan Baotixita) के माध्यम से प्यासों को जीवन का जल दे रहा है। उसका नाम 'दाइ दुआंग'—'महान महासागर'—सचमुच सार्थक हो रहा है। उसका प्रेम अब भी बह रहा है।
रयान, मेरे बेटे, तुम और बेन एक ही प्रेम की धारा के दो हिस्से हो। तुम दोनों ने साथ में जो सपने देखे, जो खिलखिलाहट साझा की, वह कभी खत्म नहीं होगी। तुम आज अपने माता-पिता के लिए उस सहारे की तरह हो जो प्रेम को थामे रखता है। तुम अकेले नहीं हो। बेन तुम्हें देख रहा है। वह अब उस अनंत आकाश में है जिसका वह सपना देखता था, वह अब उस 'कॉन चिम एयरलाइन्स' का हिस्सा है जो ईश्वर की करुणा के अनंत आकाश में उड़ रही है।
यीशु का वह प्रश्न आज भी गूँज रहा है: 'क्या तुम्हें अपने भाई पर दया नहीं करनी चाहिए थी?' दया का अर्थ है—हृदय को खोलना। आज, मैं आपसे आग्रह करता हूँ कि आप अपने स्वयं के प्रति दयालु बनें। उस पिता को माफ करें जो अपने बेटे को नहीं बचा पाया (हालाँकि उसने सब कुछ किया), उस माँ को माफ करें जो रात को जागकर रोती है। ईश्वर ने आपको माफ कर दिया है, तो आप खुद को क्यों नहीं माफ कर सकते? बेन नहीं चाहता कि आप अपराधबोध में जिएं। वह तो बस चाहता है कि आप उसकी उस मुस्कान को याद रखें जो उसने जीवन के हर मोड़ पर बिखेरी थी।
जीवन एक हिसाब-किताब नहीं है जिसे हम पूरा करें। जीवन एक उपहार है जिसे हम साझा करें। बेन ने अपना जीवन एक उपहार की तरह जिया। उसने गणित की जटिलताओं में भी सुंदरता खोजी, उसने विमानों के पंखों में ईश्वर की रचना देखी, और उसने अपनों के प्रति अपने छोटे से हृदय से अनंत प्रेम किया। वह अब उस 'भोज' में है जहाँ कोई हिसाब नहीं होता, केवल अनंत प्रेम होता है।
आज जब आप यहाँ से बाहर जाएँ, तो अपने साथ एक छोटा सा संकल्प लें। बेन की उस उदारता को याद रखें। किसी ऐसे व्यक्ति को ढूँढें जिसे आज आपकी एक मुस्कान की ज़रूरत है। किसी को माफ करें, शायद खुद को सबसे पहले। बेन की उस खिलखिलाती हुई हँसी को याद करें और अपने जीवन में उस शांति को वापस आने दें। वह मुस्कुरा रहा है, वह सुरक्षित है, और वह आपसे कह रहा है: 'बा ओई, माँ, रयान, मैं ठीक हूँ। मैं यहाँ से आप सबको देख रहा हूँ।' ईश्वर का यह प्रेम आपके हर घाव को भरे और आपको वह शांति दे जो सारी समझ से परे है। आमीन।
For the intentions entrusted to Ben on our prayer wall:
मुक्तिदाता के आदेश का पालन करते हुए और दिव्य शिक्षा से गठित होकर, हम कहने का साहस करते हैं:
हे हमारे पिता, तू स्वर्ग में है; तेरा नाम पवित्र माना जाए, तेरा राज्य आए, तेरी इच्छा जैसे स्वर्ग में, वैसे पृथ्वी पर भी पूरी हो। हमारा प्रतिदिन का आहार आज हमें दे, और हमारे अपराध क्षमा कर, जैसे हम भी अपने अपराधियों को क्षमा करते हैं; और हमें परीक्षा में न डाल, बल्कि बुराई से बचा। आमेन।
प्रभु आपको आशीष दे और आपकी रक्षा करे। वह आप पर अपना मुख चमकाए और आपको अपनी शांति प्रदान करे। आमीन।
✝ सर्वशक्तिमान ईश्वर आपको आशीष दें: पिता और पुत्र और पवित्र आत्मा। आमेन।