पिता, और पुत्र, और पवित्र आत्मा के नाम पर। आमीन। प्रभु का अनुग्रह और शांति आप सभी के साथ हो।
हे प्रभु, हम पर दया कर। हे मसीह, हम पर दया कर। हे प्रभु, हम पर दया कर।
आज हम एक ऐसे दृश्य के सामने खड़े हैं जो समय की सीमाओं को तोड़ देता है। गोल्गोथा की पहाड़ी पर, क्रूस के नीचे, एक माँ खड़ी है। वह कोई साधारण माँ नहीं है; वह मरियम है, और उसके सामने उसका पुत्र यीशु है। आज का सुसमाचार हमें बताता है कि 'यीशु ने अपनी माँ को और उस शिष्य को, जिसे वह प्रेम करता था, पास खड़े देखा।' यहाँ, दर्द की पराकाष्ठा पर, यीशु हमें एक नया रिश्ता दे रहे हैं। वे मरियम को 'माँ' कहते हैं और शिष्य को 'बेटा'। यह केवल एक विदाई नहीं है; यह एक नया जन्म है। क्रूस के नीचे, मरियम का हृदय एक तलवार से छिद गया है, जैसा कि सिमोन ने भविष्यवाणी की थी। लेकिन उस घाव से, उस दर्द से, एक नया परिवार पैदा हो रहा है।
एलन, थाओ, और रयान, मैं जानता हूँ कि तीन महीने पहले, 13 जून को, जब बेंजामिन ने इस संसार से विदा ली, तो आप भी उसी क्रूस के नीचे खड़े थे। आप उस 'तलवार' को अपने हृदय में महसूस करते हैं। जब हम बेन की बात करते हैं—उसकी वह अद्भुत बुद्धि, वह बालक जो गणित के कठिन समीकरणों को खेल-खेल में सुलझा लेता था, या वह बेन जो अपने पिता के कंधे पर सिर रखकर 'कॉन चिम एयरलाइन्स' के सपनों के बारे में हँसता था—तो हमें एहसास होता है कि वह कितना जीवंत था। वह अपनी जिज्ञासा और अपनी मुस्कान के साथ हमारे जीवन में एक प्रकाश की तरह था। लेकिन आज, जब वह प्रकाश भौतिक रूप से हमारे बीच नहीं है, तो वह सन्नाटा बहुत भारी लगता है।
मैं आज आपसे उस भारी पत्थर के बारे में बात करना चाहता हूँ जो अक्सर माता-पिता के हृदय पर बैठ जाता है। वह है 'आत्म-दोष' का पत्थर। आप में से कई लोग, जो इस भारी दुख से गुजर रहे हैं, शायद रात के अंधेरे में खुद से पूछते हैं: 'क्या मैंने कुछ छोड़ दिया? क्या मैं कुछ और कर सकता था? क्या यह मेरी कोई कमी थी?' मैं आज आपसे यीशु के नाम पर कहना चाहता हूँ: उस बोझ को वहीं क्रूस के चरणों में रख दीजिए। बेन की बीमारी, उसका जाना—यह किसी की गलती नहीं थी। यह न तो कोई सजा थी, न ही किसी की लापरवाही का नतीजा। ईश्वर ने बेन को आपको सौंपा, और आपने उसे वह प्रेम दिया जो किसी भी महल की नींव से अधिक गहरा था। आप पूरी तरह निर्दोष हैं। ईश्वर आपसे नाराज़ नहीं हैं; वे आपके आंसुओं को अपनी हथेलियों में समेट रहे हैं। वह बीमारी, वह दुख, मानवीय नियंत्रण से परे था। ईश्वर ने उसे नहीं भेजा, और आप उसे रोक नहीं सकते थे। कृपया, खुद को माफ कीजिए। बेन नहीं चाहता कि उसके माता-पिता और उसका भाई खुद को दोषी मानें।
संत पौलुस आज हमें याद दिलाते हैं कि हम मसीह के शरीर के अंग हैं। जैसे शरीर के कई अंग होते हैं, लेकिन वे एक ही शरीर हैं, वैसे ही हम सब बेन के साथ उस एक शरीर में जुड़े हुए हैं। बेन का जीवन एक उपहार था। याद कीजिए, वह बालक जो अपने चाचा विलियम की बीमारी के समय अपनी पूरी गुल्लक देने की पेशकश कर रहा था। उसने उसे तोड़ा नहीं, न ही उसने उसे खाली किया, क्योंकि उसकी आवश्यकता नहीं पड़ी, लेकिन वह 'प्रस्ताव' ही उसके हृदय का सबसे बड़ा सच था। वह अपने पास जो कुछ भी था, उसे न्योछावर करने को तैयार था। यह एक ऐसे बालक की पहचान है जिसका हृदय ईश्वर के प्रेम से भरा था। क्या आपको लगता है कि ऐसा हृदय कभी मर सकता है? नहीं। बेन का वह प्रेम आज भी वियतनाम के का माऊ में उस कुएं के माध्यम से प्यासों को जीवन का जल दे रहा है। उसका नाम 'दाइ दुआंग'—'महान महासागर'—सचमुच सार्थक हो रहा है। उसका प्रेम अब भी बह रहा है।
रयान, मेरे बेटे, तुम और बेन एक ही प्रेम की धारा के दो हिस्से हो। तुम दोनों ने साथ में जो सपने देखे, जो खिलखिलाहट साझा की, वह कभी खत्म नहीं होगी। तुम आज अपने माता-पिता के लिए उस सहारे की तरह हो जो क्रूस के नीचे खड़े होकर भी प्रेम को थामे रखता है। तुम अकेले नहीं हो। बेन तुम्हें देख रहा है। वह अब उस 'भोज' में है जहाँ कोई दर्द नहीं है, कोई बीमारी नहीं है। वह अब उस अनंत आकाश में है जिसका वह सपना देखता था, वह अब उस 'कॉन चिम एयरलाइन्स' का हिस्सा है जो ईश्वर की करुणा के अनंत आकाश में उड़ रही है।
आज का सुसमाचार हमें सिखाता है कि जब हम दुखी होते हैं, तो हम अकेले नहीं होते। मरियम वहाँ है। वह जानती है कि अपने बेटे को खोने का दर्द क्या होता है। वह आपके साथ खड़ी है। वह आपके आंसुओं को समझती है। वह आपसे कह रही है, 'मैं तुम्हारी माँ हूँ।' यीशु ने आपको मरियम को सौंपा है, और मरियम को आपको। आप इस यात्रा में अकेले नहीं हैं।
आज जब आप यहाँ से बाहर जाएँ, तो अपने साथ एक छोटा सा संकल्प लें। बेन की उस उदारता को याद रखें। किसी ऐसे व्यक्ति को ढूँढें जिसे आज आपकी एक मुस्कान की ज़रूरत है। किसी को माफ करें। और सबसे बढ़कर, उस क्रूस की ओर देखें, न कि अपनी हार की ओर। क्योंकि क्रूस पर यीशु हमें यह बता रहे हैं कि मौत आखिरी शब्द नहीं है। आखिरी शब्द 'प्रेम' है। बेन उस प्रेम में सुरक्षित है। वह मुस्कुरा रहा है, वह शांत है, और वह आपसे कह रहा है: 'बा ओई, माँ, रयान, मैं ठीक हूँ। मैं यहाँ से आप सबको देख रहा हूँ।' ईश्वर का यह प्रेम आपके हर घाव को भरे और आपको वह शांति दे जो सारी समझ से परे है। आमीन।
For the intentions entrusted to Ben on our prayer wall:
मुक्तिदाता के आदेश का पालन करते हुए और दिव्य शिक्षा से गठित होकर, हम कहने का साहस करते हैं:
हे हमारे पिता, तू स्वर्ग में है; तेरा नाम पवित्र माना जाए, तेरा राज्य आए, तेरी इच्छा जैसे स्वर्ग में, वैसे पृथ्वी पर भी पूरी हो। हमारा प्रतिदिन का आहार आज हमें दे, और हमारे अपराध क्षमा कर, जैसे हम भी अपने अपराधियों को क्षमा करते हैं; और हमें परीक्षा में न डाल, बल्कि बुराई से बचा। आमेन।
प्रभु आपको आशीष दे और आपकी रक्षा करे। पिता, और पुत्र, और पवित्र आत्मा के नाम पर। आमीन।
✝ सर्वशक्तिमान ईश्वर आपको आशीष दें: पिता और पुत्र और पवित्र आत्मा। आमेन।