पिता और पुत्र और पवित्र आत्मा के नाम पर। हमारे प्रभु यीशु मसीह का अनुग्रह, ईश्वर का प्रेम और पवित्र आत्मा का सहभाग आप सबों को मिले।
हे प्रभु, हम पर दया कर। हे मसीह, हम पर दया कर। हे प्रभु, हम पर दया कर।
कल्पना कीजिए कि आप एक भरे हुए कमरे में बैठे हैं… चारों तरफ कोलाहल है, फुसफुसाहट है, तर्कों का दौर चल रहा है। हर कोई अपनी बात साबित करने में लगा है। हवा में एक अजीब सा तनाव और उलझन है। और फिर, अचानक, कमरा बिल्कुल शांत हो जाता है। कोई चिल्लाया नहीं, किसी ने मेज़ पर हाथ नहीं पटका। केवल एक व्यक्ति खड़ा हुआ और उसने एक वाक्य बोला। उसके स्वर में कोई कठोरता नहीं थी, कोई दिखावा नहीं था, लेकिन उस आवाज़ में एक ऐसा गहरा ठहराव, एक ऐसा अधिकार (authority) था कि पूरा कमरा थम गया। हर शोर शांत हो गया। हर भटकी हुई दृष्टि उस एक चेहरे पर टिक गई।
अधिकार का अर्थ चिल्लाना नहीं होता। सच्चा अधिकार वह शांति है जो सब कुछ उसकी सही जगह पर रख देती है।
आज के सुसमाचार में, हम कफ़रनहूम के उसी सभागृह में हैं। लोग यीशु को सुन रहे हैं और चकित हैं। सुसमाचार कहता है: "वे उनके उपदेश पर चकित थे, क्योंकि उनका वचन अधिकार के साथ होता था।" उस ज़माने में व्यवस्थापक और फ़रीसी बहुत बातें करते थे। वे नियमों की व्याख्या करते थे, बहस करते थे, लेकिन उनके शब्दों में जीवन नहीं था। यीशु जब बोलते थे, तो शब्द केवल होंठों से नहीं निकलते थे; वे सीधे आत्मा की गहराइयों तक उतरते थे। वे जब बोलते थे, तो ऐसा लगता था मानो स्वयं सृष्टि की रचना करने वाली वही आवाज़ फिर से बोल रही हो जिसने कहा था: 'प्रकाश हो जाए।' और प्रकाश हो गया था।
उस सभागृह के सन्नाटे में, एक अशुद्ध आत्मा से पीड़ित व्यक्ति चिल्ला उठता है। वह भयभीत है। वह यीशु की उपस्थिति को सहन नहीं कर पा रहा है। लेकिन यीशु को उससे बहस करने की आवश्यकता नहीं पड़ी। यीशु केवल दो छोटे से वाक्य बोलते हैं: "शांत रह! और इसमें से निकल जा!"
और वह अशुद्ध आत्मा बिना उस व्यक्ति को कोई चोट पहुँचाए, बाहर निकल जाती है।
केवल एक शांत, अधिकारपूर्ण शब्द… और अंधकार को पीछे हटना पड़ता है।
आज १३ अगस्त है। हमारे प्यारे बेंजामिन वो (Benjamin Vo) को ईश्वर के स्वर्गीय घर गए दो महीने का समय बीत चुका है। १३ जून, २०२६ को जब बेन ने इस संसार से विदा ली, तो आप सभी के जीवन में समय जैसे ठहर गया। एलन, थाओ, और रयान… इन साठ दिनों में, घर का वह कोलाहल, वह चहल-पहल एक अजीब से सन्नाटे में बदल गई है। दो महीने का यह पड़ाव एक बहुत ही कठिन समय होता है। शुरुआती हफ्तों का वह दौर जब सब लोग आसपास होते थे, अब बीत चुका है। अब दुनिया अपनी गति से चलने लगी है, लेकिन आपके लिए, आपके घर के भीतर, बेन की खाली कुर्सी अब भी उसी सन्नाटे में खड़ी है।
जब दो महीने बीत जाते हैं, तो मन अक्सर उस सन्नाटे में यीशु के उसी अधिकारपूर्ण शब्द को ढूँढता है जो जीवन की उथल-पुथल को शांत कर सके।
आज का पहला पाठ संत पौलुस का कुरिन्थियों के नाम पत्र है, और यह पाठ आज के सुसमाचार के साथ एक अद्भुत ताना-बाना बुनता है। संत पौलुस लिखते हैं: "आत्मा सब कुछ खोज लेता है, यहाँ तक कि ईश्वर की गूढ़ से गूढ़ बातें भी… हमने संसार की आत्मा को नहीं, बल्कि उस आत्मा को प्राप्त किया है जो ईश्वर की ओर से है, ताकि हम उन बातों को समझ सकें जो ईश्वर ने हमें निःशुल्क दी हैं।"
संत पौलुस हमें समझाते हैं कि इस संसार में दो तरह की दृष्टियाँ होती हैं—एक 'प्राकृतिक मनुष्य' की दृष्टि, जो केवल आँखों से दिखाई देने वाली चीज़ों को देखती है, जो केवल तर्कों और गणित से सब कुछ मापना चाहती है। और दूसरी 'आध्यात्मिक मनुष्य' की दृष्टि, जो ईश्वर की आत्मा से संचालित होती है। जो दुनिया को केवल भौतिक आकृतियों में नहीं, बल्कि ईश्वर के असीम प्रेम के चश्मे से देखती है। पौलुस कहते हैं: "हमारे पास मसीह का मन (the mind of Christ) है।"
जब हम बेंजामिन के जीवन को देखते हैं, तो हम एक ऐसे बालक को पाते हैं जिसके पास यह दोनों दृष्टियाँ एक अद्भुत संतुलन में थीं।
बेन एक असाधारण प्रतिभा का धनी बालक था। केवल पंद्रह वर्ष की आयु में, उसके पास एक ऐसा तीक्ष्ण और विश्लेषणात्मक दिमाग था जो बड़ी से बड़ी गणितीय समस्याओं को और कंप्यूटर की जटिल कोडिंग को ऐसे चुटकियों में हल कर लेता था मानो वह कोई खिलौना हो। चौथी कक्षा में आठवीं की गणित हल कर लेना, एआई (AI) और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर के तर्कों को इतनी सहजता से समझ लेना… यह उसके उस तीव्र, कुशाग्र मन का प्रमाण था। वह अपने पिता की एक सच्ची 'फोटोकॉपी' था—चेहरे में भी, बुद्धि में भी और जीवन में आगे बढ़ने की आकांक्षा में भी।
लेकिन बेन केवल एक तेज दिमाग वाला लड़का नहीं था। उसके पास 'मसीह का मन' था, उसके पास वह आध्यात्मिक दृष्टि थी जिसके बारे में संत पौलुस आज बात करते हैं।
बेन के भीतर एक ऐसी बालसुलभ और निष्कपट सरलता थी जो आज के संसार में दुर्लभ है। उसे अपने पिता से कहानियाँ सुनना बहुत पसंद था। सोचिए, एक लड़का जो १४-१५ साल की उम्र में कोडिंग के बड़े-बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर सकता था, जो अपनी एक गिटहब रेपो (GitHub repo) में खुद के कोड किए हुए गेम्स और ऐप्स बनाता था, वही लड़का अपने पिता के पास बैठकर किसी छोटे बच्चे की तरह तलीन होकर कहानियाँ सुनता था! जब उसके पिता बोलते थे, तो बेन उन्हें उसी आदर और तल्लीनता से सुनता था जैसे कफ़रनहूम के लोग यीशु को सुनते थे। उसकी आँखों में कोई अहंकार नहीं था, केवल एक गहरी मासूमियत और अपने पिता के प्रति अगाध प्रेम था।
और बेन का वह सपना… 'कॉन चिम एयरलाइन्स' (Con Chim Airlines)! जब भी वह इस काल्पनिक एयरलाइन की बात करता था, जब भी वह पक्षियों और बोइंग विमानों के उड़ने के बारे में सोचता था, तो उसके चेहरे पर एक ऐसी खिलखिलाती हुई मुस्कान और मंद हँसी (giggles and smiles) आ जाती थी जो कमरे को रोशनी से भर देती थी। उसके लिए विमान केवल धातु और इंजन के ढाँचे नहीं थे। वे उसके लिए पंख थे। वे उसकी उस अनंत जिज्ञासा का हिस्सा थे जो इस धरती की सीमाओं से परे आकाश की ऊँचाइयों को छूना चाहती थी। वह अपने पिता के साथ घंटों एयरपोर्ट पर बैठकर विमानों को आते-जाते देखता था—'एयरपोर्ट स्पॉटिंग' उसके लिए केवल एक शौक नहीं था, वह पिता और पुत्र के बीच का एक पवित्र संवाद था, जहाँ शब्द कम थे और उपस्थिति ज़्यादा थी।
बेन का यह पक्षियों और विमानों के प्रति प्रेम, उसकी वह खिलखिलाहट… यह सब संत पौलुस के उस कथन को चरितार्थ करता है कि ईश्वर की आत्मा हमें उन चीज़ों को समझने की क्षमता देती है जो प्रेम से भरी हैं। बेन का दिल इतना कोमल था कि जब उसने अपने चाचा विलियम की बीमारी के बारे में सुना, तो केवल १५ वर्ष की उम्र में उसने बिना किसी के कहे अपनी माँ और पिता से कह दिया कि वह अपनी पूरी गुल्लक सौंपने को तैयार है। उसने वह गुल्लक तोड़ी नहीं, उसमें से पैसे निकाले नहीं—क्योंकि उसकी आवश्यकता नहीं पड़ी, उसके चाचा के पास बीमा था—लेकिन वह 'प्रस्ताव' ही उसके पूरे चरित्र की गवाही दे गया। एक बालक जो अपनी पूरी जमा-पूंजी को निष्कपट भाव से देने के लिए तैयार था।
लेकिन एलन और थाओ… इन साठ दिनों के सन्नाटे में, जब आप बेन की उस खाली कुर्सी को देखते हैं, जब उसके कंप्यूटर की शांत स्क्रीन को निहारते हैं, तो क्या मन के किसी अंधेरे कोने में कोई अनकहा सवाल नहीं गूँजता?
जब रात बहुत गहरी हो जाती है, जब घर की घड़ी की टिक-टिक भी कान में चुभने लगती है, तो क्या कभी यह विचार मन को नहीं सालता: 'क्या हमने कोई संकेत चूक दिया? क्या हम कुछ और कर सकते थे? क्या यह हमारी किसी लापरवाही का परिणाम है?'
यह अन कहा आत्म-दोष (guilt), यह सोचने का ज़हरीला जाल कि 'काश हमने ऐसा किया होता'… यह एक ऐसा भारी पत्थर है जो माता-पिता के दिलों को अंदर ही अंदर पीस देता है। यह दुःख को एक असहनीय बोझ बना देता है।
आज, सुसमाचार में यीशु के उस अधिकारपूर्ण वचन के साथ, मैं इस भारी पत्थर को आपके दिलों से उठाना चाहता हूँ।
याद कीजिए, सुसमाचार में जब शिष्यों ने यीशु से पूछा था कि एक व्यक्ति जन्म से अंधा क्यों था—'हे गुरु! किसने पाप किया था, इसने या इसके माता-पिता ने कि यह अंधा पैदा हुआ?'—तो यीशु ने बिल्कुल स्पष्ट और अधिकार के साथ उत्तर दिया था: "न तो इसने पाप किया था और न इसके माता-पिता ने।"
एलन और थाओ, मेरी बात को अपने आत्मा की गहराई में उतरने दीजिए: बेंजामिन की बीमारी या उसका इस संसार से विदा होना किसी की गलती नहीं थी। यह ईश्वर का कोई दंड नहीं था। यह आपकी किसी चूक, किसी कमी या किसी लापरवाही का परिणाम नहीं था। बीमारी और शारीरिक सीमाएँ इस टूटी हुई दुनिया का हिस्सा हैं; वे ईश्वर की ओर से नहीं आतीं। ईश्वर बीमारी नहीं भेजते; ईश्वर तो उस बीमारी की घड़ी में आपके साथ उस कमरे में खड़े होकर रोते हैं।
आपने बेन को जो प्रेम दिया, वह संपूर्ण था। आपने उसके साथ दुनिया के कोने-कोने की यात्रा की, उसे वेटिकन और लूर्देस के पवित्र स्थानों पर ले गए, आपने उसे एक ऐसा घर दिया जहाँ वह हर दिन मुस्कुरा सकता था, जहाँ वह अपने पिता की कहानियाँ सुन सकता था और 'कॉन चिम एयरलाइन्स' के सपने देखकर खिलखिला सकता था। आपने कुछ भी कम नहीं किया। आप पूरी तरह से निर्दोष हैं। यीशु आज आपके मन के उस उथल-पुथल मचाने वाले आत्म-दोष से कहते हैं: "शांत रह! और निकल जा!"
उस अपराधबोध के विचारों को अपने दिल से बाहर जाने दीजिए। ईश्वर आपसे नाराज़ नहीं हैं; वे आपके आंसुओं को अपनी हथेलियों में समेट रहे हैं।
आज के सुसमाचार में, जब यीशु ने उस अशुद्ध आत्मा को डाँटा, तो लिखा है: "अशुद्ध आत्मा ने उसे सबों के बीच में पटक दिया और बिना कोई हानि पहुँचाए उसमें से निकल गया।"
बिना कोई हानि पहुँचाए…
यह वाक्य कितना सांत्वना देने वाला है! बेंजामिन के शारीरिक शरीर पर भले ही बीमारी का हमला हुआ हो, लेकिन उसकी आत्मा को, उसके सुंदर और निष्कपट स्वभाव को कोई हानि नहीं पहुँची। वह अशुद्ध अंधकार, वह पीड़ा बेन की आत्मा को छू भी नहीं सकी। बेन ईश्वर का बालक था, और वह पूरी तरह से सुरक्षित होकर अपने पिता के घर लौट गया। वह बीमारी बेन के अस्तित्व को नष्ट नहीं कर सकी; वह केवल उसके शारीरिक बंधन को तोड़कर उसे अनंत आकाश में उड़ने के लिए मुक्त कर गई।
हमारा प्यारा बेन अब उस 'कॉन चिम एयरलाइन्स' का पायलट बन चुका है जिसकी वह कल्पना करता था! वह अब भौतिक विमानों की सीमा से परे, ईश्वर की अनंत शांति और महिमा के नीले आकाश में स्वतंत्र रूप से उड़ रहा है। वह अब उस स्वर्गीय भोज (Banquet of Heaven) में अपने हमनवा संत कार्लो अकुतिस के साथ बैठा है। वे दोनों पंद्रह वर्ष के बालक, जिनकी बुद्धिमत्ता और जिनका हृदय ईश्वर के प्रति प्रेम से भरा हुआ था, आज ईश्वर के सिंहासन के सामने खड़े हैं। वे दोनों मिलकर इस दुनिया के डॉक्टरों, वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के लिए प्रार्थना कर रहे हैं ताकि ल्यूकेमिया जैसी बीमारियों का इलाज खोजा जा सके, और किसी अन्य परिवार को इस कठिन मार्ग से न गुज़रना पड़े।
रयान, मेरे प्यारे बेटे, मैं आज विशेष रूप से तुमसे बात करना चाहता हूँ। तुम अपने भाई के सबसे अच्छे दोस्त थे। तुम दोनों ने मिलकर हँसी-मज़ाक किया, घूमना-फिरना किया, और एक-दूसरे के साथ खूबसूरत पल बिताए। बेन की वह तीक्ष्ण बुद्धि, उसका वह कोमल हृदय, और उसका यह विश्वास कि "कोशिश करना ही सब कुछ है" (trying is all that matters)—यह सब अब तुम्हारे भीतर जीवित है।
जब तुम मुस्कुराते हो, जब तुम अपने जीवन में आगे बढ़ते हो, तो तुम बेन की रोशनी को इस दुनिया में फैलाते हो। तुम्हें उदास नहीं होना है। तुम्हारा भाई तुमसे दूर नहीं गया है; वह केवल उस कमरे में चला गया है जहाँ ईश्वर की शांति का अधिकार है। जब भी तुम आसमान में किसी पक्षी को उड़ते देखो या किसी विमान की गूँज सुनो, तो याद रखना कि बेन तुम्हें देखकर मुस्कुरा रहा है।
और हम उन सभी परिवारों के लिए भी प्रार्थना करते हैं जो आज दूर-दराज से हमारे साथ इस प्रार्थना में जुड़े हैं। वे माता-पिता जो अस्पतालों के बिस्तरों के पास बैठकर जाग रहे हैं, वे परिवार जो किसी भी प्रकार के भारी क्रूस को उठा रहे हैं—आप अकेले नहीं हैं। ईश्वर की कलीसिया आज आपको अपनी प्रार्थनाओं की बाहों में थामती है।
आज जब हम इस पवित्र स्थान से बाहर जाएँ, तो अपने साथ एक छोटा सा, व्यावहारिक संकल्प लेकर जाएँ।
आज जब भी आपको दिन के दौरान थोड़ा सा समय मिले, तो केवल एक मिनट के लिए रुकें। अपनी आँखें बंद करें और उस शांत आवाज़ को सुनें। जैसे यीशु ने सभागृह में अधिकार के साथ शांति का वचन बोला था, वैसे ही आप भी अपने दिल में बोलें: "प्रभु, तेरी शांति मेरे घर में आए।"
अगर आप बाहर हों और आसमान में किसी पक्षी या विमान को उड़ते देखें, तो एक क्षण के लिए रुककर ईश्वर का धन्यवाद करें। बेंजामिन की उस खिलखिलाती हुई मुस्कान को याद करें, और किसी उदास व्यक्ति को देखकर एक सच्ची मुस्कान दें।
वियतनाम के का माऊ (Cà Mau) में बेन के नाम पर बना वह मीठे पानी का कुआँ (Giếng Gioan Baotixita) आज भी प्यासों को जीवन का जल दे रहा है। बेन का मध्य नाम 'दाइ दुआंग' (Đại Dương) है, जिसका अर्थ है 'महान महासागर'। बेन का प्रेम एक शांत महासागर की तरह बह रहा है, वह अब भी दूसरों के जीवन में तृप्ति और आशा ला रहा है।
एलन, आपने जो सपना देखा था—जहाँ बेन बिल्कुल स्वस्थ दिख रहा था, मुस्कुरा रहा था, और आपसे कह रहा था कि वह पूरी तरह से ठीक है और आप पर नज़र रखेगा—वह सपना कोई इत्तेफ़ाक नहीं था। वह सत्य है। बेन ईश्वर के अधिकार और सुरक्षा में है।
प्रभु यीशु मसीह का वह अधिकारपूर्ण वचन, जो हर तूफ़ान को शांत कर देता है, आज आपके दिलों को भरे।
दुःख की रात चाहे कितनी भी लंबी क्यों न हो, ईश्वर के प्रेम का सवेरा निश्चित है। और उस भोर में, हम सब पुनः मिलेंगे।
आमेन।
For the intentions entrusted to Ben on our prayer wall:
मुक्तिदाता के आदेश का पालन करते हुए और दिव्य शिक्षा से गठित होकर, हम कहने का साहस करते हैं:
हे हमारे पिता, तू स्वर्ग में है; तेरा नाम पवित्र माना जाए, तेरा राज्य आए, तेरी इच्छा जैसे स्वर्ग में, वैसे पृथ्वी पर भी पूरी हो। हमारा प्रतिदिन का आहार आज हमें दे, और हमारे अपराध क्षमा कर, जैसे हम भी अपने अपराधियों को क्षमा करते हैं; और हमें परीक्षा में न डाल, बल्कि बुराई से बचा। आमेन।
सर्वशक्तिमान ईश्वर, पिता और पुत्र और पवित्र आत्मा, आप सबों को आशीर्वाद प्रदान करे और आपकी रक्षा करे। आमेन।
✝ सर्वशक्तिमान ईश्वर आपको आशीष दें: पिता और पुत्र और पवित्र आत्मा। आमेन।