प्रभु यीशु मसीह की कृपा, परमपिता परमेश्वर का प्रेम और पवित्र आत्मा का सहभाग आप सबके साथ हो। आज के पवित्र स्मरण दिवस पर, हम ईश्वर की कृपा में एकत्रित हुए हैं। आइए, हम सब मिलकर ईश्वर के नाम पर आरम्भ करें: पिता, और पुत्र, और पवित्र आत्मा के नाम पर। आमीन।
हे ईश्वर, दया कर। हे मसीह, दया कर। हे ईश्वर, दया कर।
प्रिय भाइयों और बहनों,
आज हम धन्य कुँवारी मरियम के स्वर्ग की रानी के रूप में स्मरण कर रहे हैं। यह एक ऐसा दिन है जो हमें स्वर्ग की महिमा और पृथ्वी पर ईश्वर के शासन की ओर ले जाता है। आज के पहले पाठ में, यहेजकेल नबी एक अद्भुत दर्शन देखते हैं। वह मंदिर को ईश्वर की महिमा से भरा हुआ देखते हैं। वह सुनते हैं कि ईश्वर कहते हैं, "यह वह स्थान है जहाँ मेरा सिंहासन होगा, यह वह स्थान है जहाँ मेरे पैरों की तलियाँ रखी जाएँगी; यहीं मैं इस्राएल की सन्तान के बीच सदा वास करूँगा।" (यहेजकेल 43:7)
यह दर्शन हमें ईश्वर की उपस्थिति की पवित्रता और उसकी महिमा का एहसास कराता है। यह एक ऐसा स्थान है जहाँ ईश्वर का वास है, जहाँ उसकी संप्रभुता प्रकट होती है। और इस महिमा के साथ, भजनकार गाता है, "प्रभु का तेज हमारे देश में वास करेगा।" (भजन 85:9)
यह केवल एक प्राचीन मंदिर या किसी भौगोलिक स्थान की बात नहीं है। यह ईश्वर के राज्य का प्रतीक है, जहाँ उसकी इच्छा पूरी होती है, जहाँ न्याय और शांति का वास होता है। यह वह स्थान है जहाँ ईश्वर का प्रेम हमारे हृदयों में वास करता है, और जहाँ हम उसके बच्चे बनकर रहते हैं।
आज के सुसमाचार में, यीशु भीड़ और अपने शिष्यों से कहते हैं, "शास्त्रियों और फरीसियों ने मूसा की गद्दी पर अधिकार कर लिया है। इसलिए जो कुछ वे तुम्हें बताते हैं, वह सब करो और मानो। पर उनके कामों के अनुसार न चलो, क्योंकि वे कहते हैं, पर करते नहीं।" (मत्ती 23:2-3)
यीशु यहाँ एक बहुत ही महत्वपूर्ण बात पर जोर देते हैं: यह कि हमें ईश्वर के वचन का पालन करना चाहिए, लेकिन उन लोगों के उदाहरण का अनुसरण नहीं करना चाहिए जो केवल दिखावे के लिए जीते हैं। फरीसी और शास्त्री नियमों का बोझ लोगों पर लाद देते थे, लेकिन वे स्वयं उसे उठाने को तैयार नहीं थे। वे सम्मान, प्रशंसा और ऊँचे पद चाहते थे। यीशु कहते हैं, "वे अपनी फरीसी टोपी को चौड़ा और अपने वस्त्रों के नीचे के झालर को लम्बा करते हैं। वे भोजों में प्रधान स्थान और सभाओं में मुख्य आसन चाहते हैं, बाजारों में अभिवादन और लोगों से 'रब्बी' कहलाना चाहते हैं।" (मत्ती 23:5-7)
लेकिन यीशु का संदेश बिल्कुल विपरीत है। वह कहते हैं, "तुममें जो सबसे बड़ा हो, वह तुम्हारा सेवक हो। जो कोई अपने आप को बड़ा बनाएगा, वह छोटा किया जाएगा; और जो कोई अपने आप को छोटा बनाएगा, वह बड़ा किया जाएगा।" (मत्ती 23:11-12)
यह संदेश हमें ईश्वर के राज्य की वास्तविक प्रकृति सिखाता है। स्वर्ग की रानी का पद भी हमें यह याद दिलाता है कि ईश्वर का राज्य शक्ति, पद या सांसारिक गौरव पर आधारित नहीं है, बल्कि सेवा, नम्रता और प्रेम पर आधारित है। धन्य कुँवारी मरियम, स्वर्ग की रानी, अपनी नम्रता और ईश्वर की इच्छा के प्रति अपनी पूर्ण समर्पण के कारण ही महान बनीं। उन्होंने कभी अपने आप को ऊँचा नहीं किया, बल्कि ईश्वर की सेवा में अपना जीवन समर्पित कर दिया।
हमारा जीवन भी ईश्वर की महिमा का मंदिर बनना चाहिए। यह वह स्थान होना चाहिए जहाँ ईश्वर का प्रेम वास करे, जहाँ हम सेवा और नम्रता का जीवन जीएँ। लेकिन कभी-कभी, हम भी उन फरीसियों की तरह बन जाते हैं। हम दिखावे के लिए जीते हैं, हम दूसरों से प्रशंसा चाहते हैं, हम अपने आप को बड़ा दिखाने की कोशिश करते हैं।
और जब हम इस संघर्ष में होते हैं, तो हमें अपने प्यारे बेंजामिन वो (Benjamin Vo) की याद आती है। बेन, जो केवल पंद्रह साल का था, उसने हमें सेवा और नम्रता का एक अद्भुत पाठ सिखाया। वह एक असाधारण बुद्धि का बालक था, जिसकी जिज्ञासा की कोई सीमा नहीं थी। वह तकनीक की दुनिया में गहराई तक उतर जाता था, एआई (AI), डेवऑप्स (DevOps) और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर (Cloud Infrastructure) जैसी जटिल चीजों को समझता था। वह अपने पिता के साथ घंटों बैठकर हवाई जहाजों के बारे में बातें करता था, अपनी खुद की एयरलाइन 'कॉन चिम एयरलाइन्स' (Con Chim Airlines) के सपने देखता था। उसकी आँखों में हमेशा एक चमक होती थी, एक उत्साह होता था, जब वह उन चीजों के बारे में बात करता था जिनसे उसे प्यार था।
लेकिन उसकी बुद्धिमत्ता और महत्वाकांक्षा के पीछे, एक अत्यंत कोमल और करुणामयी हृदय था। हमें याद है कि कैसे वह बारह साल की उम्र में अपने पिता के चालीसवें जन्मदिन पर, अपने पिता को खोने के डर से रो पड़ा था। यह उसके गहरे प्रेम और अपने परिवार से उसके अटूट बंधन का प्रमाण था। वह एक ऐसा बालक था जिसने कभी अपने आप को बड़ा नहीं समझा। वह दूसरों की मदद करने के लिए हमेशा तैयार रहता था। हमें याद है कि कैसे उसने अपने चाचा विलियम की मदद के लिए अपने गुल्लक के सारे पैसे देने की पेशकश की थी, जब वे स्ट्रोक से पीड़ित थे। यह एक ऐसा कार्य था जो उसकी कोमल आत्मा और सेवा की भावना को दर्शाता है।
बेन का जीवन हमें सिखाता है कि ईश्वर की महिमा हमारे भीतर तब वास करती है जब हम नम्र होते हैं, जब हम दूसरों की सेवा करते हैं, जब हम ईश्वर की इच्छा के प्रति समर्पित होते हैं। वह फरीसियों की तरह नहीं था, जो नियमों का बोझ लादते थे, बल्कि वह स्वयं एक सेवक था। उसने अपने जीवन के हर पल में, अपनी छोटी सी उम्र के बावजूद, सेवा और प्रेम का एक ऐसा उदाहरण पेश किया जो हम सबके लिए प्रेरणा का स्रोत है।
आज, जब हम धन्य कुँवारी मरियम को स्वर्ग की रानी के रूप में याद करते हैं, तो हम बेन को भी याद करते हैं, जो अब स्वर्ग में ईश्वर की उपस्थिति में है। वह अब उन बच्चों में से एक है, जिन्हें यीशु ने कहा था, "छोटे बच्चों को मेरे पास आने दो, और उन्हें रोको मत, क्योंकि स्वर्ग का राज्य ऐसे ही लोगों का है।" (मत्ती 19:14)
एलन, थाओ और प्यारे रयान, और आप सभी जो आज यहाँ उपस्थित हैं या दूर से जुड़े हुए हैं, जो बेन के जाने के बाद से एक गहरा खालीपन महसूस कर रहे हैं... मैं जानता हूँ कि यह समय कितना कठिन है। दो महीने बीत चुके हैं, लेकिन घाव अभी भी ताज़ा हैं। आप सब उस खालीपन को महसूस करते होंगे, उस आवाज़ को जो अब सुनाई नहीं देती, उस मुस्कान को जो अब सामने नहीं है।
लेकिन आज का पाठ हमें आशा देता है। यहेजकेल नबी को ईश्वर की महिमा का दर्शन हुआ, और भजनकार गाता है कि ईश्वर का तेज हमारे देश में वास करेगा। इसका मतलब है कि ईश्वर हमारे बीच है, भले ही हम उसे हमेशा महसूस न कर सकें। ईश्वर की महिमा हमारे जीवन में तब प्रकट होती है जब हम सेवा करते हैं, जब हम नम्र होते हैं, जब हम प्रेम करते हैं।
बेन का जीवन, अपनी छोटी सी अवधि के बावजूद, ईश्वर की महिमा का एक प्रकाशस्तंभ था। उसने हमें दिखाया कि कैसे एक युवा हृदय भी सेवा और प्रेम से भरा हो सकता है। उसने हमें सिखाया कि सबसे बड़ा वह है जो सबसे छोटा बनता है, जो दूसरों की सेवा करता है।
आज, जब हम बेन को याद करते हैं, तो हम केवल उसके जाने का दुख नहीं मनाते, बल्कि उसके जीवन का उत्सव मनाते हैं। हम उस कोमल आत्मा का उत्सव मनाते हैं, उस जिज्ञासु मन का उत्सव मनाते हैं, उस सेवा-भाव का उत्सव मनाते हैं। हम उसके जीवन को ईश्वर की महिमा के एक प्रकाश के रूप में देखते हैं, जो हमारे हृदयों को प्रकाशित करता है।
एलन और थाओ, जब आप बेन के बारे में सोचते हैं, तो याद रखें कि उसका प्रेम कभी खत्म नहीं हुआ। वह प्रेम आज भी आपके साथ है, आपके भाइयों के साथ है, और उन सभी के साथ है जिन्होंने उसे प्यार किया। वह प्रेम आज भी दुनिया में काम कर रहा है। वह प्रेम आज भी आपको शक्ति दे रहा है।
हमें याद है कि कैसे बेन ने अपने पिता के साथ आइसक्रीम खरीदने के लिए लाइन में खड़े होकर भुगतान किया था। यह एक छोटा सा पल था, लेकिन यह उसके बड़े दिल का प्रतीक था। उसने अपने पिता के लिए भुगतान किया, उसने प्यार दिखाया।
और वह सपना जो आपके पिता ने देखा था... जहाँ बेन ने कहा, 'बाओ ओई, टेस्ट नाओ कोन सीम वे हेट। कोन तू थो हिएन दुओक बिन्ह थुओंग मा... सao कोन लाई बी नी वे न्ही?' (पिताजी, मैं सभी परीक्षणों को पास कर चुका हूँ। मैं सामान्य रूप से सांस ले सकता हूँ... मुझे ऐसा क्यों हो रहा है?) और आपने उसे गले लगाया। यह उस गहरे बंधन का प्रतीक है जो आप दोनों के बीच था। यह उस पीड़ा का प्रतीक है जो बेन ने अनुभव की, लेकिन साथ ही, यह उस शांति का भी प्रतीक है जो उसे अब मिली है। और जब बेन ने कहा, 'खोंग साओ डौ, कोन से डोई थेओ बा मे' (कोई बात नहीं, मैं माता-पिता का ख्याल रखूंगा)। यह उसका वादा है कि वह हमेशा आपके साथ है। वह हमेशा आपकी रक्षा करेगा।
यह हमें याद दिलाता है कि बेन का जीवन, भले ही छोटा रहा हो, ईश्वर की योजना का हिस्सा था। वह ईश्वर के प्रेम का एक सुंदर प्रतिबिंब था। और अब वह स्वर्ग में, ईश्वर की महिमा में वास कर रहा है, जहाँ कोई दुख, कोई दर्द नहीं है।
हम आप सभी के लिए प्रार्थना करते हैं, जो आज इस दुख से गुजर रहे हैं। हम प्रार्थना करते हैं कि ईश्वर आपको शांति दे, आपको शक्ति दे, और आपको आशा दे। हम प्रार्थना करते हैं कि बेन की याद आपको हमेशा ईश्वर के प्रेम की ओर ले जाए।
यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि ईश्वर का प्रेम किसी भी दुख से बड़ा है। ईश्वर का प्रेम मृत्यु से भी बड़ा है। और बेन आज उसी प्रेम में जी रहा है। वह अब ईश्वर की महिमा में है, जहाँ वह धन्य कुँवारी मरियम के साथ है, जो स्वर्ग की रानी है।
और हम सब, जो यहाँ पृथ्वी पर हैं, ईश्वर के राज्य के नागरिक हैं। हम सब ईश्वर के बच्चे हैं। और हमें एक-दूसरे की सेवा करनी चाहिए, एक-दूसरे से प्रेम करना चाहिए, और ईश्वर की इच्छा पूरी करनी चाहिए।
आज के दिन, आइए हम बेन की याद को अपने हृदयों में संजो कर रखें। आइए हम उसके नम्रता और सेवा के उदाहरण का अनुसरण करें। आइए हम ईश्वर की महिमा को अपने जीवन में प्रकट करें, ताकि हमारा जीवन भी ईश्वर के राज्य का एक छोटा सा मंदिर बन सके।
प्रभु यीशु मसीह, जो नम्र और दीन हृदय वाले हैं, हमें भी अपने जैसा नम्र और दीन हृदय प्रदान करें, ताकि हम स्वर्ग के राज्य के योग्य बन सकें। आमीन।
For the intentions entrusted to Ben on our prayer wall:
मुक्तिदाता के आदेश का पालन करते हुए और दिव्य शिक्षा से गठित होकर, हम कहने का साहस करते हैं:
हे हमारे पिता, तू स्वर्ग में है; तेरा नाम पवित्र माना जाए, तेरा राज्य आए, तेरी इच्छा जैसे स्वर्ग में, वैसे पृथ्वी पर भी पूरी हो। हमारा प्रतिदिन का आहार आज हमें दे, और हमारे अपराध क्षमा कर, जैसे हम भी अपने अपराधियों को क्षमा करते हैं; और हमें परीक्षा में न डाल, बल्कि बुराई से बचा। आमेन।
प्रभु आपको आशीर्वाद दे और आपकी रक्षा करे। प्रभु आप पर अपनी दया दृष्टि रखे और आपको शांति प्रदान करे। आमेन।
✝ सर्वशक्तिमान ईश्वर आपको आशीष दें: पिता और पुत्र और पवित्र आत्मा। आमेन।