पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा के नाम पर। आमीन। प्रभु आप सबके साथ रहें! आज हम संत याकूब, प्रेरित के पर्व पर एकत्र हुए हैं, और हम इस पवित्र समय में ईश्वर के वचन पर मनन करने के लिए अपने हृदयों को खोलते हैं।
हे प्रभु, दया कर। हे ख्रीस्त, दया कर। हे प्रभु, दया कर।
प्रिय भाई-बहनों, आज के पाठ हमें एक गहरा सत्य सिखाते हैं: कि ईश्वर की शक्ति हमारी कमजोरियों में प्रकट होती है। संत पौलुस कुरिन्थियों को लिखते हैं, 'हम इस खजाने को मिट्टी के बर्तनों में रखते हैं, ताकि अत्यधिक शक्ति ईश्वर की हो, न कि हमारी।' यह एक सुंदर और शक्तिशाली छवि है, है ना? हम, मिट्टी के बर्तनों की तरह, कमजोर, भंगुर और त्रुटिपूर्ण हैं। फिर भी, ईश्वर ने हम में अपना अनमोल खजाना, अपनी कृपा और अपनी जीवन-शक्ति रखी है। हम हर तरह से पीड़ित हो सकते हैं, लेकिन बाधित नहीं होते; भ्रमित हो सकते हैं, लेकिन निराशा में नहीं पड़ते; सताए जा सकते हैं, लेकिन त्यागे नहीं जाते; गिराए जा सकते हैं, लेकिन नष्ट नहीं होते। यह ईश्वर की शक्ति है जो हमें बनाए रखती है।
और फिर, सुसमाचार में, हम याकूब और यूहन्ना की माँ को यीशु के पास आते हुए देखते हैं, जो अपने बेटों के लिए महिमा का स्थान माँगती है। वह नहीं जानती थी कि वह क्या माँग रही थी। यीशु उनसे पूछते हैं, 'क्या तुम वह प्याला पी सकते हो जो मैं पीने वाला हूँ?' और वे कहते हैं, 'हम पी सकते हैं।' यीशु उन्हें बताते हैं कि उनका प्याला वे वास्तव में पिएँगे, लेकिन दाहिने या बाएँ बैठना उनके पिता का काम है। यीशु आगे समझाते हैं कि उनके शिष्यों के बीच महानता का अर्थ सेवा है, न कि प्रभुत्व। 'मनुष्य का पुत्र सेवा करने नहीं, बल्कि सेवा करने और बहुतों के छुटकारे के लिए अपना जीवन देने आया था।'
यह सेवा का आह्वान, यह मिट्टी के बर्तन में रखे गए खजाने का रहस्य, हमें बेंजामिन वो के जीवन में भी दिखाई देता है, जिसे हम प्यार से बेन कहते थे। बेन का जीवन, हालांकि छोटा था, हमें सिखाता है कि कैसे एक युवा व्यक्ति भी ईश्वर की सेवा में अपना जीवन जी सकता है, अपनी कमजोरियों के बावजूद। बेन एक ऐसा लड़का था जिसमें असाधारण बुद्धि और असीम जिज्ञासा थी। वह हमेशा नई चीज़ें सीखने और समझने के लिए उत्सुक रहता था, चाहे वह AI हो या AWS। उसकी यह जिज्ञासा, यह ज्ञान की प्यास, एक तरह से ईश्वर की सृष्टि को समझने की सेवा थी। लेकिन उसकी बुद्धिमत्ता के साथ-साथ, उसका हृदय भी अत्यंत कोमल था। वह अपने पिता के 40वें जन्मदिन पर उन्हें खोने के डर से रो पड़ा था - यह उसके गहरे और सुंदर बंधन का एक शांत प्रमाण था। यह कोमलता, यह प्रेम, यह दूसरों के प्रति सहानुभूति ही वह खजाना था जो बेन के 'मिट्टी के बर्तन' में था।
पौलुस कहते हैं कि हम 'हमेशा शरीर में यीशु की मृत्यु को धारण करते हैं, ताकि यीशु का जीवन भी हमारे शरीर में प्रकट हो।' बेन के जीवन में, हमने यीशु के जीवन की झलक देखी - उसकी दयालुता में, उसकी मुस्कान में, और दूसरों के प्रति उसके सहज प्रेम में। उसने हमें दिखाया कि कैसे एक युवा जीवन भी ईश्वर के प्रेम का एक सुंदर प्रतिबिंब बन सकता है। उसकी सेवा का एक सुंदर उदाहरण उसके नाम पर वियतनाम में बनाया गया 'प्रेम का कुआँ' है, जो उसकी भावना की तरह ही दूसरों को जीवन और आशा देता है।
आज, छह सप्ताह बाद जब बेन प्रभु के पास गया, हम उसके माता-पिता, एलन और थाओ, उसके भाई रयान, और उसके सभी प्रियजनों को याद करते हैं। हम जानते हैं कि आपका दुःख गहरा है, लेकिन हम आपको विश्वास दिलाते हैं कि ईश्वर आपके साथ हैं। भजन कहता है, 'जो आँसू बोते हैं, वे आनंद से काटेंगे।' आपके आँसू, आपके दुःख, व्यर्थ नहीं हैं। वे ईश्वर के प्रेम की मिट्टी में बोए गए बीज हैं, जो अंततः आनंद का फल देंगे। उन सभी बच्चों के लिए जो पीड़ित हैं, और उन सभी परिवारों के लिए जो एक भारी क्रूस उठा रहे हैं, हम प्रार्थना करते हैं कि आप ईश्वर की गोद में सुरक्षित महसूस करें। ईश्वर आपको देखते हैं, आपको समझते हैं, और आपको अपने प्रेम में धारण करते हैं। बेन का जीवन, उसकी कोमलता और उसका प्रेम, हमें सिखाता है कि हमें हमेशा आशा रखनी चाहिए और एक-दूसरे की सेवा करनी चाहिए। आमीन।
For the intentions entrusted to Ben on our prayer wall:
मुक्तिदाता के आदेश का पालन करते हुए और दिव्य शिक्षा से गठित होकर, हम कहने का साहस करते हैं:
हे हमारे पिता, तू स्वर्ग में है; तेरा नाम पवित्र माना जाए, तेरा राज्य आए, तेरी इच्छा जैसे स्वर्ग में, वैसे पृथ्वी पर भी पूरी हो। हमारा प्रतिदिन का आहार आज हमें दे, और हमारे अपराध क्षमा कर, जैसे हम भी अपने अपराधियों को क्षमा करते हैं; और हमें परीक्षा में न डाल, बल्कि बुराई से बचा। आमेन।
प्रभु आपको आशीष दें और आपकी रक्षा करें। प्रभु अपनी ज्योति आप पर चमकाएँ और आप पर दया करें। प्रभु अपना मुख आपकी ओर करें और आपको शांति दें।
✝ सर्वशक्तिमान ईश्वर आपको आशीष दें: पिता और पुत्र और पवित्र आत्मा। आमेन।