आज का वचन

सामान्य काल के बाईसवें सप्ताह का सोमवार

Monday, August 31, 2026 · in memory of Ben
एक भक्ति जो मिस्सा के बाद होती है - उसका विकल्प नहीं।
प्रारंभिक प्रार्थना

पिता और पुत्र और पवित्र आत्मा के नाम पर। आमेन। प्रभु यीशु मसीह की कृपा, ईश्वर का प्रेम और पवित्र आत्मा का साहचर्य आप सबों को मिले।

क्षमा याचना

हे प्रभु, हम पर दया कर। हे मसीह, हम पर दया कर। हे प्रभु, हम पर दया कर।

♪ “Hindi Kyrie (Majestic Version)” — A song for Ben
ईश्वर का वचन
पहला पाठ · 1 Corinthians 2:1-5
भाइयों और बहनों, जब मैं ईश्वर के रहस्य की घोषणा करने आपके पास आया, तो मैं शब्दों या बुद्धिमत्ता के लालित्य के साथ नहीं आया। क्योंकि मैंने आपके बीच रहते हुए यीशु मसीह और उनके क्रूसारोपण के अलावा और कुछ न जानने का निश्चय किया था। मैं आपके पास दुर्बलता, भय और अत्यधिक कंपकंपाहट के साथ आया। मेरा संदेश और मेरी घोषणा मानवीय बुद्धिमत्ता के प्रेरक शब्दों में नहीं थी, बल्कि आत्मा और शक्ति के प्रदर्शन में थी, ताकि आपका विश्वास मनुष्यों की बुद्धिमत्ता पर नहीं, बल्कि ईश्वर की शक्ति पर आधारित हो।
अनुक्रियात्मक भजन · Psalm 119:97, 98, 99, 100, 101, 102
R. (97) हे प्रभु, मुझे आपके आदेशों से प्रेम है। अहा! मुझे आपकी व्यवस्था से कितना प्रेम है! दिन भर मैं उसी का ध्यान करता हूँ। R. हे प्रभु, मुझे आपके आदेशों से प्रेम है। आपकी आज्ञा ने मुझे मेरे शत्रुओं से अधिक बुद्धिमान बनाया है, क्योंकि वह सदा मेरे साथ रहती है। R. हे प्रभु, मुझे आपके आदेशों से प्रेम है। मुझे अपने सभी शिक्षकों से अधिक समझ है, क्योंकि आपकी शिक्षाएं ही मेरा ध्यान हैं। R. हे प्रभु, मुझे आपके आदेशों से प्रेम है। मुझे प्राचीनों से अधिक विवेक प्राप्त है, क्योंकि मैं आपके नियमों का पालन करता हूँ। R. हे प्रभु, मुझे आपके आदेशों से प्रेम है। मैंने हर बुरे मार्ग से अपने पैरों को रोके रखा है, ताकि मैं आपके वचन का पालन कर सकूँ। R. हे प्रभु, मुझे आपके आदेशों से प्रेम है। मैं आपके निर्णयों से पीछे नहीं हटा हूँ, क्योंकि आपने ही मुझे सिखाया है। R. हे प्रभु, मुझे आपके आदेशों से प्रेम है।
सुसमाचार · Luke 4:16-30
यीशु नाज़रत आए, जहाँ वे बड़े हुए थे, और अपनी रीति के अनुसार विश्रामदिवस को सभागृह में गए। वे पढ़ने के लिए खड़े हुए और उन्हें यशायाह नबी का ग्रंथ सौंपा गया। उन्होंने ग्रंथ को खोला और वह स्थान निकाला जहाँ लिखा था: 'प्रभु का आत्मा मुझ पर है, क्योंकि उसने गरीबों को सुसमाचार सुनाने के लिए मेरा अभिषेक किया है। उसने मुझे बंदियों को मुक्ति और अंधों को दृष्टि पाने की घोषणा करने, उत्पीड़ितों को स्वतंत्र करने, और प्रभु के अनुग्रह के वर्ष की घोषणा करने के लिए भेजा है।' फिर ग्रंथ को लपेटकर उन्होंने उसे सेवक को लौटा दिया और बैठ गए। सभागृह में मौजूद सभी लोगों की आँखें उन पर टिकी थीं। उन्होंने उनसे कहना शुरू किया, "आज यह धर्मग्रंथ तुम्हारे सुनते ही पूरा हो गया है।" और सबने उनकी प्रशंसा की और उस अनुग्रहकारी वाणी पर चकित हुए जो उनके मुख से निकलती थी। उन्होंने कहा, "क्या यह यूसूफ का बेटा नहीं है?" यीशु ने उनसे कहा, "तुम निश्चित रूप से मुझसे यह कहावत कहोगे, 'हे वैद्य, अपने आप को चंगा कर!' और कहोगे, 'जो बातें हमने कफ़रनहूम में सुनी हैं, वे यहाँ अपने गृहनगर में भी कर।'" उन्होंने आगे कहा, "मैं तुमसे सत्य कहता हूँ, कोई भी नबी अपने गृहनगर में स्वीकार नहीं किया जाता। मैं तुमसे सच कहता हूँ कि एलियाह के दिनों में इस्राएल में अनेक विधवाएँ थीं, जब साढ़े तीन वर्ष तक आकाश बंद रहा और संपूर्ण देश में भारी अकाल पड़ा; फिर भी एलियाह को उनमें से किसी के पास नहीं भेजा गया, बल्कि केवल सीदोन देश के ज़ारेफात की एक विधवा के पास। और एलीशा नबी के समय में इस्राएल में अनेक कोढ़ी थे; फिर भी उनमें से कोई शुद्ध नहीं किया गया, केवल सिरिया का नाअमान।" जब सभागृह के लोगों ने यह सुना, तो वे क्रोध से भर गए। वे उठे, उन्हें नगर से बाहर खदेड़ दिया और उस पहाड़ी की चोटी पर ले गए जिस पर उनका नगर बसा था, ताकि उन्हें नीचे पटक दें। परंतु वे उनके बीच से होकर निकल गए और चले गए।
हे प्रभु, मुझे आपके आदेशों से प्रेम है।
उपदेश

कल्पना कीजिए एक शांत कमरे की… जहाँ मेज़ पर चर्मपत्र का एक पुराना लपेटा हुआ ग्रंथ रखा है। लकड़ी और पुरानी स्याही की एक हल्की सी गंध हवा में तैर रही है। कोई अपने कोमल हाथों से उस लपेटे हुए पन्ने को पकड़ता है, उसे बहुत धीरे-धीरे खोलता है, एक-एक पंक्ति को पढ़ता है, और फिर जब पाठ समाप्त होता है, तो उसे पुनः सम्मानपूर्वक लपेटकर रख देता है।

उस लपेटे हुए ग्रंथ में शब्द लिखे हैं, लेकिन असली जीवंतता उन हाथों में है जो उसे खोलते हैं, और उस सांस में है जो उन शब्दों को बोलती है।

आज के सुसमाचार में हम नाज़रत के उस छोटे से सभागृह में हैं। यीशु अपने गृहनगर में खड़े होते हैं। उन्हें यशायाह नबी का लपेटा हुआ ग्रंथ सौंपा जाता है। वे उसे खोलते हैं, पढ़ते हैं, और फिर उसे लपेटकर सेवक को वापस दे देते हैं। वहाँ बैठे हर व्यक्ति की आँखें उन पर टिकी हैं। कमरे में एक ऐसा सन्नाटा है जिसमें दिल की धड़कन भी सुनाई दे सकती है। और फिर यीशु कहते हैं: "आज यह धर्मग्रंथ तुम्हारे सुनते ही पूरा हो गया है।"

यह ग्रंथ का खोला जाना और फिर लपेटा जाना… आज हमारे दिलों के बहुत करीब पहुँचता है।

आज १३ अगस्त है। हमारे प्यारे बेंजामिन वो (Benjamin Vo) को ईश्वर के स्वर्गीय घर गए लगभग दो महीने बीत चुके हैं। १३ जून, २०२६ की वह दोपहर… और आज का यह दिन। इन साठ दिनों में, एलन, थाओ, और रयान, आपके लिए समय जैसे ठहर सा गया है। जब हम किसी पंद्रह वर्ष के बालक के जीवन को देखते हैं, तो हमें लगता है कि उसके जीवन का ग्रंथ अभी तो शुरू ही हुआ था। अभी तो उसके पन्ने खुल ही रहे थे। और अचानक, हमारे देखने के नज़रिए से, वह ग्रंथ लपेट दिया गया।

जब दो महीने का समय बीत जाता है, तो शुरुआती दिनों का वह हड़कंप शांत होने लगता है, लेकिन घर की शांति और भी गहरी और भारी हो जाती है। वह कमरा जहाँ बेन बैठकर अपने कंप्यूटर पर कोड लिखता था, वह स्क्रीन जहाँ वह अपने विचारों को आकार देता था, वह कुर्सी जो अब खाली है… यह सब देखकर मन पूछता है: 'प्रभु, यह ग्रंथ इतनी जल्दी क्यों लपेट दिया गया? अभी तो इसमें कितनी कहानियाँ लिखी जानी बाकी थीं।'

लेकिन आइए, आज के ईश्वर के वचन की गहराई में उतरें और देखें कि प्रभु हमसे क्या कह रहे हैं।

आज का पहला पाठ संत पौलुस का कुरिन्थियों के नाम पत्र है। संत पौलुस कोई साधारण व्यक्ति नहीं थे; वे एक विद्वान थे। लेकिन वे कहते हैं: "जब मैं आपके पास आया, तो शब्दों या बुद्धिमत्ता के लालित्य के साथ नहीं आया… मैं आपके पास दुर्बलता, भय और अत्यधिक कंपकंपाहट के साथ आया।"

पौलुस स्वीकार करते हैं कि मानव जीवन में एक ऐसी दुर्बलता होती है जो हमें घुटनों पर ले आती है। हम अपनी इंसानी बुद्धिमत्ता से सब कुछ नियंत्रित करना चाहते हैं, हम हर चीज़ का हिसाब लगाना चाहते हैं, लेकिन ऐसी घड़ियाँ आती हैं जब हमारे पास शब्द समाप्त हो जाते हैं। जब हमारी सारी योजनाएँ और हमारी सारी समझ उस महान रहस्य के सामने छोटी पड़ जाती है।

हमारे प्यारे बेंजामिन—हमारे बेन—के पास एक अद्भुत और असाधारण दिमाग था। वह केवल चौदह-पंद्रह वर्ष की उम्र में एआई (AI), क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉजिक की जटिल दुनिया को इतनी आसानी से समझ लेता था मानो वह कोई खेल हो। चौथी कक्षा में आठवीं की गणित हल कर लेना उसकी तीक्ष्ण बुद्धि का प्रमाण था। वह अपने पिता की एक सच्ची 'फोटोकॉपी' था—रूप में भी और विचार की गहराई में भी। वह अपने पिता के साथ बैठकर उड़न खटोलों, बोइंग विमानों और तकनीक की बड़ी-बड़ी बातें करता था।

लेकिन बेन की असली सुंदरता उसकी उस तीव्र बुद्धिमत्ता में नहीं थी। उसकी असली सुंदरता उस 'दुर्बलता और सरलता' में थी जिसका वर्णन पौलुस करते हैं। बेन एक ऐसा बालक था जो अपने पिता की कहानियों को घंटों बैठकर इतनी तल्लीनता से सुनता था जैसे कोई छोटा बच्चा कोई अद्भूत कथा सुन रहा हो। उसके चेहरे पर हमेशा एक कोमल, मासूम मुस्कान रहती थी। उसके पास एक ऐसा दिल था जो दूसरों के दर्द को देखकर पिघल जाता था।

जब वह केवल पंद्रह वर्ष का था, तो उसने अपने चाचा विलियम की बीमारी की खबर सुनकर, बिना किसी के कहे, अपनी पूरी गुल्लक देने का प्रस्ताव रखा था। उसने वह गुल्लक तोड़ी नहीं, उसमें से पैसे निकाले नहीं—क्योंकि उसकी आवश्यकता नहीं पड़ी, उसके चाचा के पास बीमा था—लेकिन वह 'प्रस्ताव' ही उसके पूरे चरित्र को बयाँ कर गया। एक बालक जो अपनी जमा-पूंजी को बिना किसी हिचकिचाहट के सौंपने को तैयार था।

यही वह बात है जो संत पौलुस आज कहते हैं: "ताकि आपका विश्वास मनुष्यों की बुद्धिमत्ता पर नहीं, बल्कि ईश्वर की शक्ति पर आधारित हो।"

बेन का जीवन केवल कोड की पंक्तियों (lines of code) या गणितीय समीकरणों से नहीं मापा जा सकता। उसका जीवन ईश्वर की उस अदृश्य शक्ति और आत्मा से भरा हुआ था जो उसके कोमल व्यवहार में, उसके आदरयुक्त स्वभाव में, और उसकी उस सहज खुशी में झलकती थी।

एलन और थाओ, मैं आज बहुत ही कोमलता और आदर के साथ आपके उस दर्द के पास आना चाहता हूँ जो रात के अंधेरे में अक्सर एक भारी बोझ बन जाता है। इन दो महीनों में, जब आप बेन की खाली कुर्सी को देखते हैं, या उसकी पुरानी तस्वीरों को निहारते हैं, तो क्या मन के किसी कोने में यह सवाल उठता है: 'क्या हमसे कोई चूक हुई? क्या हमने उस ग्रंथ के पन्नों को ठीक से नहीं पढ़ा? क्या हम कुछ और कर सकते थे?'

यह सवाल, यह अन कहा आत्म-दोष (guilt), एक ऐसा भारी पत्थर है जो माता-पिता के दिलों को अंदर ही अंदर तोड़ देता है।

आज, प्रभु के वचन के पूर्ण अधिकार के साथ, मैं इस पत्थर को आपके दिलों से उठाना चाहता हूँ।

याद कीजिए, जब यीशु से पूछा गया था कि एक व्यक्ति क्यों अंधा पैदा हुआ था—'किसने पाप किया, इसने या इसके माता-पिता ने?'—तो यीशु ने बिल्कुल स्पष्ट कहा था: "न तो इसने पाप किया और न इसके माता-पिता ने।"

एलन और थाओ, मेरी बात को अपने दिल की गहराई में उतरने दीजिए: बेंजामिन की बीमारी या उसका इस संसार से जाना किसी की गलती नहीं थी। यह ईश्वर का कोई दंड नहीं था। यह किसी की लापरवाही या चूक का परिणाम नहीं था। बीमारी और दुःख इस टूटी हुई दुनिया के हिस्से हैं, वे ईश्वर की ओर से नहीं आते। ईश्वर बीमारी नहीं भेजते; ईश्वर तो उस बीमारी के समय आपके साथ रोते हैं।

आपने बेन को जो प्रेम दिया, वह संपूर्ण था। आपने उसके साथ दुनिया की यात्राएँ कीं, उसे वेटिकन और लूर्देस के पवित्र स्थानों पर ले गए, आपने उसके साथ 'एयरपोर्ट स्पॉटिंग' के अनमोल पल बिताए, आपने उसे एक ऐसा घर दिया जहाँ वह हमेशा सुरक्षित और प्रिय महसूस करता था। आपने कुछ भी कम नहीं किया। आप पूरी तरह से निर्दोष हैं। उस आत्म-दोष के भारी बोझ को आज यहीं प्रभु के चरणों में छोड़ दीजिए। ईश्वर आपसे नाराज़ नहीं हैं; वे आपके आंसुओं को अपनी हथेलियों में समेट रहे हैं।

आज के सुसमाचार में एक बहुत ही रहस्यमयी घटना घटती है। जब नाज़रत के लोग यीशु की कड़वी सच्चाइयों को सुनकर क्रोधित हो जाते हैं, तो वे उन्हें पहाड़ी की चोटी से नीचे फेंकने के लिए ले जाते हैं। वे उन्हें नष्ट करना चाहते थे। लेकिन सुसमाचार का अंतिम वाक्य क्या कहता है?

"परंतु वे उनके बीच से होकर निकल गए और चले गए।"

वे उनके बीच से होकर शांत भाव से निकल गए। कोई उन्हें रोक नहीं सका, कोई उन्हें नुकसान नहीं पहुँचा सका, क्योंकि वे ईश्वर की सुरक्षा में थे।

हमारा प्यारा बेंजामिन वो भी, अपनी उस बीमारी और शारीरिक पीड़ा के बीच से होकर, बिल्कुल सुरक्षित रूप से निकल गया है। इस दुनिया की कोई बीमारी, कोई दर्द, कोई मृत्यु अब उसे छू नहीं सकती। वह उस भीड़ के बीच से होकर सीधे ईश्वर की बाहों में चला गया है। वह अब उस अनंत ग्रंथ का हिस्सा बन गया है जिसे स्वयं ईश्वर ने अपने हाथों में थाम रखा है।

बेन अब स्वर्ग के उस महान भोज (Banquet of Heaven) में संत कार्लो अकुतिस के साथ बैठा है। वे दोनों, जो इतनी कम उम्र में इस संसार से विदा हुए, आज ईश्वर के सामने खड़े होकर इस दुनिया के डॉक्टरों और वैज्ञानिकों के लिए प्रार्थना कर रहे हैं ताकि ल्यूकेमिया का इलाज खोजा जा सके और किसी अन्य परिवार को इस कठिन मार्ग से न गुज़रना पड़े।

रयान, मेरे प्यारे बेटे, मैं आज विशेष रूप से तुमसे बात करना चाहता हूँ। तुम अपने भाई के सबसे अच्छे दोस्त थे। तुम दोनों ने मिलकर हँसी-मज़ाक किया, गेमिंग की, और एक-दूसरे का हाथ थामा। जब यीशु ने नाज़रत में ग्रंथ को लपेटा, तो उन्होंने संदेश समाप्त नहीं किया; उन्होंने उसे 'पूरा' किया। बेन का जीवन अधूरा नहीं छूटा है; ईश्वर की दृष्टि में वह पूरा हो गया है। और अब, बेन का वह प्रेम, उसकी वह जिज्ञासा, उसका वह विचार कि 'कोशिश करना ही सब कुछ है' (trying is all that matters)—यह सब तुम्हारे भीतर जीवित है।

जब तुम मुस्कुराते हो, जब तुम आगे बढ़ते हो, तो तुम बेन की रोशनी को इस दुनिया में फैलाते हो। तुम्हें उदास नहीं होना है, क्योंकि तुम्हारा भाई तुमसे दूर नहीं है; वह ईश्वर की शांति में तुम्हारे बहुत करीब है।

और हम उन सभी परिवारों के लिए भी प्रार्थना करते हैं जो आज दूर-दराज से हमारे साथ इस सेवा में जुड़े हैं। वे माता-पिता जो अपने बीमार बच्चों के बिस्तरों के पास बैठकर रातें गुज़ार रहे हैं, वे परिवार जो किसी भी भारी क्रूस को उठा रहे हैं—आप अकेले नहीं हैं। ईश्वर की कलीसिया आज आपको अपनी प्रार्थनाओं की बाहों में समेटती है।

आज जब हम इस पवित्र स्थान से बाहर जाएँ, तो अपने साथ एक छोटा सा, व्यावहारिक संकल्प लेकर जाएँ।

आज अपने घर में बाइबल या ईश्वर का वचन खोलें। उसकी एक छोटी सी पंक्ति को पढ़ें। जैसे यीशु ने ग्रंथ खोला और उसमें से आशा का वचन पढ़ा, वैसे ही आप भी ईश्वर के एक छोटे से वचन को अपने हृदय में रखें। जब भी मन उदास हो, उस एक पंक्ति को दोहराएँ: "प्रभु का आत्मा मुझ पर है।"

बेंजामिन का जीवन लपेटा जरूर गया है, लेकिन वह समाप्त नहीं हुआ है। वियतनाम के का माऊ (Cà Mau) में उसके नाम पर बना वह कुआँ (Giếng Gioan Baotixita) आज भी प्यासों को जीवन का जल दे रहा है। यह इस बात का प्रतीक है कि बेन का प्यार अब भी बह रहा है, वह अब भी दूसरों के जीवन में खुशियाँ ला रहा है।

एलन, आपने जो सपना देखा था—जहाँ बेन ने आपसे कहा था कि वह पूरी तरह से ठीक है, वह सामान्य रूप से सांस ले रहा है, और वह आप पर नज़र रखेगा—वह कोई भ्रम नहीं था। वह सत्य है। वह ईश्वर की शांति में है। वह मुस्कुरा रहा है और आपसे कह रहा है: "बा ओई, माँ, रयान... मैं ठीक हूँ। मैं ईश्वर के घर में सुरक्षित हूँ।"

ईश्वर की शांति, जो हमारी हर समझ से परे है, आपके हृदय और आपके विचारों की रक्षा प्रभु यीशु मसीह में करे।

दुःख की रात चाहे कितनी भी लंबी क्यों न हो, ईश्वर के प्रेम का सवेरा निश्चित है। और उस सवेरे में, हम सब पुनः मिलेंगे।

आमेन।

मनन
♪ “Teri Baahon Mein (Vocal/Piano/Strings)” — A song for Ben
विश्वासियों की प्रार्थनाएं

For the intentions entrusted to Ben on our prayer wall:

“Hey Ben, अगर हो सके तो सपने में Minh से ज़रूर मिलना, चाहे बस एक नमस्ते हो या वैसी ही मुस्कान जैसे तुम फोटो खिंचवाने के लिए पोज़ दिया करते थे। तुम्हारी बहुत याद आती है और तुमसे बहुत प्यार है।”
… हम Ben को सौंपते हैं, जो इसे प्रभु तक पहुँचाता है।
℟ Ben, हमारे लिए प्रार्थना करो।
“हे Ben - यहाँ एक चमत्कार की ज़रूरत है। हमें तुम्हारी बहुत याद आती है और हम ज़्यादा सो नहीं पा रहे हैं। Ryan चाहता है कि तुम यहाँ होते, खासकर इस आने वाले शनिवार को, ताकि वो तुम्हारे साथ Project Flight का नया वर्शन खेल सके।” — Dad
… हम Ben को सौंपते हैं, जो इसे प्रभु तक पहुँचाता है।
℟ Ben, हमारे लिए प्रार्थना करो।
“प्रिय Ben, हमारे अंकल Thanh का निधन हो गया है। कृपया उनका ख्याल रखना और प्रार्थना करना कि उनकी आत्मा को शांति मिले। उनका संत नाम Phêrô है। हे प्रभु, मेरे जीवन में Chu Thanh को भेजने के लिए धन्यवाद। हाई स्कूल में उन्होंने मुझे गणित पढ़ाने में जो समय बिताया, उसके लिए मैं हमेशा आभारी रहूँगा।” — Dad
… हम Ben को सौंपते हैं, जो इसे प्रभु तक पहुँचाता है।
℟ Ben, हमारे लिए प्रार्थना करो।
“Ben, तुम्हारे बारे में सोचना बंद नहीं हो रहा... काश मैं समय में पीछे जाकर चीज़ों को बदलने की कोशिश कर पाता... शायद तुम्हारे साथ ज़्यादा समय बिताता और काम थोड़ा कम करता। कृपया मेरे और माँ के लिए प्रार्थना करना।” — Dad
… हम Ben को सौंपते हैं, जो इसे प्रभु तक पहुँचाता है।
℟ Ben, हमारे लिए प्रार्थना करो।
“तुम्हारी बहुत याद आती है, Ben - इन दिनों ठीक से सो नहीं पा रहा हूँ। जब भी तुम आ सको, एक बार मिलने ज़रूर आना। तुमसे बहुत प्यार है।” — Dad
… हम Ben को सौंपते हैं, जो इसे प्रभु तक पहुँचाता है।
℟ Ben, हमारे लिए प्रार्थना करो।
“कृपया William के लिए प्रार्थना करें। कृपया उसकी माँ को उसकी इतनी याद आने के दुख से उबरने में मदद करें।” — Dianna Maria
… हम Ben को सौंपते हैं, जो इसे प्रभु तक पहुँचाता है।
℟ Ben, हमारे लिए प्रार्थना करो।
“Hey Ben, Ryan तुम्हें बहुत याद करता है और काश तुम यहाँ उसके साथ गेम खेलने के लिए होते। कृपया अपनी आत्मा से उस पर नज़र रखना और ज़िंदगी में उसका मार्गदर्शन करना। उसे मज़बूत रहने और ईश्वर पर अपना विश्वास बनाए रखने में मदद करना। कृपया घर आना और Hi कहना।”
… हम Ben को सौंपते हैं, जो इसे प्रभु तक पहुँचाता है।
℟ Ben, हमारे लिए प्रार्थना करो।
“कृपया Debora के लिए प्रार्थना करना, वह दो हफ़्ते पहले अपने पति Steve को छोड़कर चली गई है। उसका पति बहुत गहरे दर्द में है और सो भी नहीं पा रहा है।”
… हम Ben को सौंपते हैं, जो इसे प्रभु तक पहुँचाता है।
℟ Ben, हमारे लिए प्रार्थना करो।

🕯 प्रार्थना दीवार पर अपनी प्रार्थना रोशन करें →

प्रभु की प्रार्थना

मुक्तिदाता के आदेश का पालन करते हुए और दिव्य शिक्षा से गठित होकर, हम कहने का साहस करते हैं:

हे हमारे पिता, तू स्वर्ग में है; तेरा नाम पवित्र माना जाए, तेरा राज्य आए, तेरी इच्छा जैसे स्वर्ग में, वैसे पृथ्वी पर भी पूरी हो। हमारा प्रतिदिन का आहार आज हमें दे, और हमारे अपराध क्षमा कर, जैसे हम भी अपने अपराधियों को क्षमा करते हैं; और हमें परीक्षा में न डाल, बल्कि बुराई से बचा। आमेन।

आध्यात्मिक परमप्रसाद
हे मेरे यीशु, मैं विश्वास करता हूँ कि आप परमपवित्र संस्कार में वास्तव में उपस्थित हैं। मैं सब वस्तुओं से बढ़कर आपसे प्रेम करता हूँ, और अपनी आत्मा में आपको ग्रहण करने की तीव्र इच्छा रखता हूँ। चूंकि मैं इस समय आपको संस्कारगत रूप से ग्रहण नहीं कर सकता, आप कम से कम आध्यात्मिक रूप से मेरे हृदय में आइए। मैं आपका आलिंगन करता हूँ मानो आप पहले से ही वहाँ उपस्थित थे, और अपने आप को पूरी तरह से आपसे जोड़ता हूँ। मुझे कभी भी आपसे अलग न होने दीजिए। आमेन।
कम्युनियन गीत
♪ “Mahan Balidaan (Version A)” — A song for Ben
समापन आशीर्वाद

सर्वशक्तिमान ईश्वर, पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा आप सबों को आशीर्वाद प्रदान करे और आपकी रक्षा करे। आमेन।

✝ सर्वशक्तिमान ईश्वर आपको आशीष दें: पिता और पुत्र और पवित्र आत्मा। आमेन।

समापन गीत
♪ “Ummeed Ki Jyoti (Version B)” — A song for Ben
पिछ्ले दिन
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