पिता और पुत्र और पवित्र आत्मा के नाम पर। प्रभु ईसा मसीह की कृपा, ईश्वर का प्रेम और पवित्र आत्मा का साहचर्य आप सभी को प्राप्त हो। आज हम उस महान नबी की शहादत को याद करते हैं जिसने प्रभु के लिए मार्ग तैयार किया।
हे प्रभु, हम पापी हैं, हम पर दया कर। हे मसीह, तूने हमें बचाने के लिए दुःख सहा, हम पर दया कर। हे प्रभु, तू हमें अपनी शांति प्रदान कर, हम पर दया कर।
कल्पना कीजिए एक छोटी सी मिट्टी की गुल्लक की... वह शायद किसी मेज़ के कोने पर रखी है, धूल से थोड़ी धुंधली, लेकिन उसके भीतर एक बच्चे के सपनों की खनक है। वह गुल्लक केवल सिक्कों का पात्र नहीं है; वह एक वादे का, एक इरादे का और एक निष्कपट प्रेम का प्रतीक है। एक बच्चा अपनी छोटी सी बचत को सहेजता है, यह सोचकर कि एक दिन वह इससे अपनी पसंद की कोई चीज़ खरीदेगा। लेकिन फिर एक दिन, वह बच्चा बिना किसी के कहे, बिना किसी दबाव के, अपनी उस पूरी दुनिया को—अपनी उस गुल्लक को—किसी और के लिए सौंपने का प्रस्ताव रखता है।
आज के पहले पाठ में, संत पौलुस कुरिन्थियों से कहते हैं: "ईश्वर ने संसार के दुर्बलों को चुन लिया, जिससे वह शक्तिशालियों को लज्जित करे... ईश्वर ने संसार के नीच और तुच्छ समझे जाने वालों को चुन लिया, जिससे वह बड़ों को मिटा दे।" और आज का सुसमाचार हमें एक बहुत ही विचलित करने वाली छवि दिखाता है—एक थाली (platter) जिस पर संत योहन बपतिस्ता का सिर रखा है।
आज १३ अगस्त है। हमारे प्यारे बेंजामिन वो (Benjamin Vo) को ईश्वर के घर गए आज पूरे दो महीने बीत चुके हैं। एलन और थाओ, मैं जानता हूँ कि ये साठ दिन कैसे बीते हैं। जब शुरुआती हफ्तों का वह शोर-शराबा शांत हो जाता है, जब लोग अपने-अपने कामों में व्यस्त हो जाते हैं, तब घर का वह सन्नाटा और भी गहरा हो जाता है। वह खाली कुर्सी, वह कंप्यूटर जिस पर अब कोडिंग की नई पंक्तियाँ नहीं लिखी जा रही हैं, वह कमरा जहाँ अब केवल यादों की खुशबू बची है... दो महीने का यह समय वह समय है जब दुःख अपनी जड़ें गहरी करता है। यह वह समय है जब सुबह उठना एक पहाड़ चढ़ने जैसा महसूस होता है।
आज के सुसमाचार में हम हेरोद के महल के उस क्रूर भोज को देखते हैं। वहाँ नाच-गाना है, शराब है, और अहंकार है। वहाँ एक 'थाली' का उपयोग मृत्यु को परोसने के लिए किया गया। लेकिन मैं आज एक दूसरी 'थाली' के बारे में बात करना चाहता हूँ—वह थाली जो बेंजामिन ने अपने जीवन से सजाई थी।
बेंजामिन, जिसे हम प्यार से बेन कहते थे, वह एक असाधारण बुद्धि वाला बालक था। चौथी कक्षा में आठवीं की गणित हल कर लेना, चौदह वर्ष की उम्र में एआई (AI) और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर की जटिलताओं को समझना—यह उसकी मानवीय बुद्धिमत्ता थी। वह अपने पिता की एक सच्ची 'फोटोकॉपी' था, महत्वाकांक्षी और तेज़। लेकिन संत पौलुस कहते हैं कि ईश्वर संसार के बुद्धिमानों को लज्जित करने के लिए सरल हृदय वालों को चुनता है। बेन की असली महानता उसकी कोडिंग में नहीं, बल्कि उसके उस 'गुल्लक वाले दिल' में थी।
याद कीजिए उस पल को, जब बेन केवल १५ वर्ष का था। उसे पता चला कि उसके चाचा विलियम को स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्या हुई है। बिना किसी के कहे, उस बालक ने अपने माता-पिता से कहा कि वह अपनी पूरी गुल्लक, अपनी सारी जमा-पूंजी अपने चाचा की मदद के लिए देने को तैयार है। उसने वह गुल्लक तोड़ी नहीं, उसे खाली नहीं किया, क्योंकि उसकी ज़रूरत नहीं पड़ी—उसके चाचा के पास बीमा था। लेकिन वह 'प्रस्ताव' (offer) ही सब कुछ था।
एक पंद्रह साल का लड़का, जो अपनी दुनिया बनाना चाहता था, अपनी पूरी बचत एक पल में त्यागने को तैयार हो गया। यही वह 'दुर्बलता' है जिसे ईश्वर चुनता है। दुनिया इसे मूर्खता कह सकती है, लेकिन ईश्वर के राज्य में, यही वह बुद्धिमत्ता है जो बड़ों-बड़ों को लज्जित कर देती है। हेरोद ने अपनी थाली पर नफरत और अहंकार परोसा था, लेकिन बेंजामिन ने अपने जीवन की थाली पर दया और त्याग परोसा।
एलन और थाओ, मैं आज बहुत ही कोमलता से आपके उस घाव को छूना चाहता हूँ जो शायद इन दो महीनों में और भी कच्चा हो गया है। जब हम किसी अपने को, और वह भी इतने होनहार बच्चे को खोते हैं, तो मन के किसी अंधेरे कोने में एक ज़हरीला विचार जन्म लेता है: 'क्या हमने कुछ गलत किया? क्या हम कुछ और कर सकते थे? क्या यह हमारी किसी गलती की सज़ा है?'
आज, प्रभु के वचन के अधिकार से, मैं आपसे वही कहना चाहता हूँ जो यीशु ने उस व्यक्ति के बारे में कहा था जो जन्म से अंधा था: "न तो इसने पाप किया और न इसके माता-पिता ने।"
मेरी बात को ध्यान से सुनिए: बेंजामिन की बीमारी या उसका जाना किसी का दोष नहीं है। यह ईश्वर का दंड नहीं है। ईश्वर बीमारी नहीं भेजते; वे तो बीमारी के समय हमारे बिस्तर के पास बैठकर हमारे साथ आँसू बहाते हैं। आपने बेन को जो प्यार दिया, वह किसी भी दवा से बढ़कर था। आपने उसे दुनिया दिखाई, उसे वेटिकन और लूर्देस की पवित्र यात्राओं पर ले गए, आपने उसके साथ 'एयरपोर्ट स्पॉटिंग' की यादें बनाईं। आपने कुछ भी कम नहीं किया। आप पूरी तरह निर्दोष हैं। उस आत्म-दोष के पत्थर को आज यहीं वेदी के पास छोड़ दीजिए। आपका प्यार ही वह प्रकाश था जिसमें बेन ने अपना जीवन इतनी खूबसूरती से जिया।
योहन बपतिस्ता ने जेल की कोठरी में अपनी शहादत दी। वह अकेला था, लेकिन वह सत्य के साथ था। बेंजामिन ने भी अपनी लड़ाई एक योद्धा की तरह लड़ी। उसने कभी हार नहीं मानी। उसका वह विश्वास कि "कोशिश करना ही सब कुछ है" (trying is all that matters), आज हमारे लिए एक मशाल है।
रयान, मेरे प्यारे बेटे, मैं आज विशेष रूप से तुमसे बात करना चाहता हूँ। तुम अपने भाई के सबसे अच्छे दोस्त थे। तुमने उसके साथ खिलौनों की दुकानों में वक्त बिताया, तुमने उसके साथ हँसी-मज़ाक किया। बेन की वह गुल्लक, वह उदारता, अब तुम्हारे भीतर जीवित है। जब तुम अपने माता-पिता का हाथ थामते हो, तो तुम बेन के प्यार को ही थाम रहे होते हो। तुम्हें उदास नहीं होना है, क्योंकि बेन अब स्वर्ग के उस 'भोज' (Banquet of Heaven) में संत कार्लो अकुतिस के साथ बैठा है। वे दोनों अब उन सभी बच्चों के लिए मध्यस्थता कर रहे हैं जो आज अस्पतालों में संघर्ष कर रहे हैं।
आज का भजन कहता है: "प्रभु की आँखें उन पर टिकी रहती हैं, जो उसका आदर करते हैं, जो उसकी दया की आशा करते हैं, जिससे वह उन्हें मृत्यु से बचाए और अकाल के समय जीवित रखे।"
बेंजामिन वो आज मृत्यु से मुक्त हो चुका है। वह अब उस 'कॉन चिम एयरलाइन्स' (Con Chim Airlines) का पायलट है जो बादलों से बहुत ऊपर, ईश्वर की अनंत शांति में उड़ रहा है। वह अब उस 'ग्रेट ओशन' (Đại Dương) का हिस्सा है जहाँ कोई लहर उसे डरा नहीं सकती।
आज जब आप यहाँ से बाहर जाएँ, तो अपने साथ एक छोटा सा संकल्प लेकर जाएँ।
अपनी मुट्ठी को बंद मत रखिए। बेन की उस गुल्लक को याद कीजिए। उसने उसे बंद नहीं रखा, उसने उसे खोलने का प्रस्ताव दिया। आज किसी को एक मुस्कान दीजिए, किसी की छोटी सी मदद कीजिए, या बस किसी के लिए प्रार्थना कीजिए। वियतनाम के का माऊ (Cà Mau) में बेन के नाम पर बना वह कुआँ (Giếng Gioan Baotixita) आज भी प्यासों को पानी दे रहा है। बेन का प्यार मर नहीं सकता; वह केवल रूप बदल लेता है।
एलन, थाओ, रयान... और वे सभी जो आज दूर से इस प्रार्थना में जुड़े हैं, विशेषकर वे परिवार जो अपने बच्चों के लिए रो रहे हैं—आप अकेले नहीं हैं। कलीसिया आपको अपनी बाहों में थामे हुए है।
अंत में, मैं उस शांति की प्रार्थना करता हूँ जो हर समझ से परे है। बेंजामिन अब प्रभु के विश्राम में है। वह अब बीमार नहीं है, वह अब थका हुआ नहीं है। वह मुस्कुरा रहा है, और वह आपसे कह रहा है: "बा ओई, माँ, रयान... मैं ठीक हूँ। मैं यहाँ से आप सबको देख रहा हूँ।"
दुःख की रात लंबी हो सकती है, लेकिन भोर निश्चित है। और उस भोर में, हम फिर मिलेंगे।
आमीन।
For the intentions entrusted to Ben on our prayer wall:
मुक्तिदाता के आदेश का पालन करते हुए और दिव्य शिक्षा से गठित होकर, हम कहने का साहस करते हैं:
हे हमारे पिता, तू स्वर्ग में है; तेरा नाम पवित्र माना जाए, तेरा राज्य आए, तेरी इच्छा जैसे स्वर्ग में, वैसे पृथ्वी पर भी पूरी हो। हमारा प्रतिदिन का आहार आज हमें दे, और हमारे अपराध क्षमा कर, जैसे हम भी अपने अपराधियों को क्षमा करते हैं; और हमें परीक्षा में न डाल, बल्कि बुराई से बचा। आमेन।
प्रभु आपको शांति दे और आपके हृदयों को अपने प्रेम में स्थिर रखे। बेंजामिन की आत्मा और सभी मृतकों की आत्माएँ, ईश्वर की दया से, शांति में विश्राम करें। आमीन।
✝ सर्वशक्तिमान ईश्वर आपको आशीष दें: पिता और पुत्र और पवित्र आत्मा। आमेन।